
क्रिकेट की दुनिया में एक ऐसा सिस्टम है जिसने न्याय की भावना को बढ़ावा दिया है, लेकिन साथ ही कई विवादों को भी जन्म दिया है – डिसिजन रिव्यू सिस्टम (DRS)। DRS का उपयोग पहली बार 2008 में एक टेस्ट मैच में किया गया था, और तब से यह खेल के नियमों और निर्णय लेने की प्रक्रिया में गहराई से उलझ गया है। हाल ही में, भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक महत्वपूर्ण टेस्ट मैच में DRS के इस्तेमाल को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें एक बार फिर इस सिस्टम की विश्वसनीयता और न्यायपूर्णता पर सवाल उठे हैं।
आज की खबर यह है कि भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) से DRS प्रणाली में सुधार की मांग की है, विशेष रूप से उन मामलों के लिए जहां बैल ट्रैकिंग तकनीक और एज डिटेक्शन सिस्टम के बीच असंगति पैदा होती है। यह विवाद केवल एक खिलाड़ी या मैच की सीमा में नहीं रहा, बल्कि पूरे क्रिकेट समुदाय में एक व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।
DRS क्या है और यह कैसे काम करता है?
DRS एक ऐसी तकनीक-आधारित प्रणाली है जिसका उद्देश्य अम्पायर के निर्णयों को चुनौती देने और सटीकता सुनिश्चित करने की अनुमति देना है। यह प्रणाली तीन मुख्य तकनीकों पर आधारित है:
- हॉक-आई (Hawk-Eye): जो गेंद के रास्ते का तीन आयामी प्रक्षेपण दिखाता है।
- स्निकोमीटर (Snicko) या UltraEdge: जो बैट और गेंद के बीच संपर्क की ध्वनि का पता लगाता है।
- हॉट स्पॉट: जो बैट और गेंद के संपर्क की गर्मी को दर्शाता है।
जब कोई टीम किसी निर्णय पर अपील करती है, तो थर्ड अम्पायर इन डेटा स्रोतों का उपयोग करके निर्णय लेता है। यदि साक्ष्य स्पष्ट होता है, तो मूल निर्णय बदल दिया जाता है।
ICC की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, DRS का उद्देश्य “खेल के न्याय को बढ़ावा देना” है, न कि अम्पायरों की भूमिका को कम करना। फिर भी, कई मामलों में यह विश्वास कमजोर पड़ गया है, खासकर जब भौतिक साक्ष्य और तकनीकी डेटा के बीच अंतर आता है।
हालिया DRS विवाद: क्या हुआ था?
दिसंबर 2025 के शुरुआती दौर में, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड ओवल में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच के दौरान DRS के एक फैसले ने क्रिकेट जगत में तूफान खड़ा कर दिया। भारतीय कप्तान के लिए एक महत्वपूर्ण विकेट के लिए, ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज ने DRS का इस्तेमाल किया, जिसमें हॉक-आई ने यह दिखाया कि गेंद स्टंप्स के भीतर जा रही थी। हालांकि, UltraEdge पर कोई स्पष्ट स्निक (बैट का संपर्क) दिखाई नहीं दिया।
थर्ड अम्पायर ने “not out” का फैसला सुनाया, जिसे भारतीय पक्ष ने साफ तौर पर गलत बताया। BCCI ने तुरंत ICC को पत्र लिखा और मांग की कि DRS प्रणाली में सुधार किया जाए, विशेष रूप से उन परिस्थितियों में जहां बैल ट्रैकिंग और स्निक डेटा एक-दूसरे के खिलाफ हों।
इस घटना के बाद से, कई पूर्व क्रिकेटरों और तकनीकी विश्लेषकों ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। ESPNcricinfo के एक विश्लेषण में कहा गया है कि “DRS की वर्तमान सेटिंग्स अस्पष्टताओं को जन्म देती हैं, क्योंकि यह अभी भी मानवीय व्याख्या पर निर्भर करती है, भले ही डेटा ऑब्जेक्टिव हो।”
DRS प्रणाली की तकनीकी सीमाएँ
DRS कई बार सही होता है, लेकिन यह अविनाशी नहीं है। हॉक-आई प्रणाली 2.6 मीटर की दूरी तक गेंद की गति और घूमने के आधार पर भविष्यवाणी करती है। यह अनुमान केवल एक प्रोजेक्शन है – वास्तविकता नहीं। इसी तरह, UltraEdge कभी-कभी गेंद के पैड या ग्लव्स से टकराने की आवाज़ को भी बैट के संपर्क के रूप में गलत तरीके से प्रदर्शित कर सकता है।
MIT के एक अध्ययन में स्पष्ट किया गया है कि तकनीकी प्रणालियाँ अक्सर “संदर्भ-निर्भर” होती हैं और उन्हें एल्गोरिथ्मिक बायस (algorithmic bias) से ग्रस्त होने का खतरा रहता है। यहाँ तक कि डेटा सेट भी संदर्भ के आधार पर अलग-अलग परिणाम दे सकता है, जैसे पिच की स्थिति, गेंद की गति, या हवा की दिशा।
इसीलिए कई विशेषज्ञों का मानना है कि DRS को “अंतिम निर्णयकर्ता” के बजाय “सहायता उपकरण” के रूप में देखा जाना चाहिए।
DRS के पक्ष और विपक्ष में तर्क
DRS के समर्थक इस बात पर जोर देते हैं कि यह खेल में न्याय और निष्पक्षता लाता है। एक BBC स्पोर्ट्स रिपोर्ट के अनुसार, टेस्ट क्रिकेट में DRS के इस्तेमाल से अम्पायरों के निर्णय सटीकता में 90% से अधिक सुधान आया है। विशेष रूप से एलबीडब्ल्यू (LBW) के मामलों में, DRS ने खिलाड़ियों को न्याय मिलने का एक सही माध्यम दिया है।
दूसरी ओर, आलोचक यह तर्क देते हैं कि DRS खेल की गति को धीमा करता है, नाटकीयता कम करता है, और कभी-कभी गलत निष्कर्ष पर पहुँचता है। इसके अलावा, DRS प्रणाली महंगी है, जिसके कारण कई छोटे क्रिकेट देश इसका उपयोग नहीं कर पाते, जिससे असमान प्रतिस्पर्धा की स्थिति पैदा होती है।
BBC के एक लेख में कहा गया है कि “DRS की लागत प्रति मैच 50,000 डॉलर से अधिक हो सकती है, जो कई अंतरराष्ट्रीय टीमों के बजट से परे है।”
DRS विवाद के मुख्य कारण
DRS में आए विवादों के पीछे कई तकनीकी और प्रशासनिक कारण हैं:
- असंगत डेटा स्रोत: जब हॉक-आई और UltraEdge एक-दूसरे के विपरीत साक्ष्य देते हैं, तो अम्पायर के लिए निर्णय लेना मुश्किल हो जाता है।
- अम्पायर की व्याख्या: DRS डेटा कैसे पढ़ा जाता है, यह अभी भी मानवीय व्याख्या पर निर्भर करता है।
- तकनीकी गड़बड़ी: कई बार कैमरे या सेंसर में खराबी हो जाती है, जिससे गलत डेटा उत्पन्न होता है।
- सीमित चुनौतियाँ: प्रति पारी केवल दो या तीन चुनौतियों की सीमा होने के कारण टीमें सही समय पर अपील नहीं कर पातीं।
इन कारणों से DRS अक्सर “सही गलती” करने वाली प्रणाली के रूप में उभरता है – जहाँ सही तकनीकी डेटा होता है, लेकिन अंतिम निर्णय गलत हो जाता है।
विशेषज्ञों का मत: क्या सुधार संभव है?
कई पूर्व अम्पायर और क्रिकेट विश्लेषकों ने DRS प्रणाली में सुधार के लिए विभिन्न सुझाव दिए हैं। उदाहरण के लिए, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के पूर्व अम्पायर सलीम बाटिस्ता का कहना है कि “हॉक-आई और एज डिटेक्शन सिस्टम को एकीकृत करने की आवश्यकता है, ताकि असंगति कम हो।”
कुछ अन्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि DRS में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया जाए, जो मानव अम्पायर के निर्णय के स्थान पर एक स्वचालित प्रणाली द्वारा अंतिम निर्णय ले सके। हालांकि, The Guardian के एक लेख में चेतावनी दी गई है कि AI भी निष्पक्षता की गारंटी नहीं दे सकता, खासकर जब तक डेटा सेट पूरी तरह से प्रशिक्षित न हो।
DRS: अन्य खेलों के साथ तुलना
DRS की तुलना अन्य खेलों में उपयोग की जाने वाली समीक्षा प्रणालियों से की जा सकती है। उदाहरण के लिए, फुटबॉल में VAR (विडियो एसिस्टेंट रेफरी) भी कई विवादों का कारण बना है, लेकिन इसकी मानवीय निर्णय प्रक्रिया DRS से अलग है।
| पहलू | क्रिकेट (DRS) | फुटबॉल (VAR) | टेनिस (Hawk-Eye) |
|---|---|---|---|
| उपयोग की सीमा | प्रति पारी 2-3 चुनौतियाँ | असीमित, लेकिन केवल निर्दिष्ट मामलों में | प्रति सेट 3 चुनौतियाँ |
| अम्पायर की भूमिका | सहायता, अंतिम निर्णय थर्ड अम्पायर द्वारा | समीक्षा के बाद मैदान पर अम्पायर अंतिम निर्णय लेता है | स्वचालित, मानवीय हस्तक्षेप नहीं |
| तकनीकी आधार | हॉक-आई, UltraEdge, Hot Spot | वीडियो रिप्ले, ट्रैकिंग सिस्टम | केवल हॉक-आई |
| विवादों की आवृत्ति | उच्च | मध्यम | कम |
एक दिलचस्प बात यह है कि टेनिस में हॉक-आई का उपयोग DRS से अधिक सटीक माना जाता है, क्योंकि वहाँ मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होती। ITF की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, हॉक-आई की सटीकता 99.9% है, जो क्रिकेट में इसकी भूमिका की तुलना में कहीं अधिक विश्वसनीय है।
क्या BCCI की मांग वाजिब है?
BCCI की ओर से DRS प्रणाली में सुधार की मांग कई कारणों से वाजिब लगती है। पहला, भारतीय टीम ने इस प्रणाली के कारण कई महत्वपूर्ण मैचों में नुकसान उठाया है। दूसरा, ICC को वैश्विक स्तर पर न्यायसंगत मानक सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि BCCI की आलोचना “भावनात्मक प्रतिक्रिया” हो सकती है, खासकर जब मैच का परिणाम इस पर निर्भर हो। Cricbuzz के एक विश्लेषण में कहा गया है कि “जबकि DRS में सुधार की आवश्यकता है, एकल घटना के आधार पर नीति में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।”
वास्तव में, ICC को एक स्वतंत्र तकनीकी समिति गठित करनी चाहिए जो DRS प्रणाली की समीक्षा करे और वैज्ञानिक आधार पर सुझाव दे।
DRS से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQ)
क्या DRS हर मैच में उपलब्ध है?
नहीं। DRS केवल उन मैचों में उपलब्ध है जहां ICC या स्थानीय क्रिकेट बोर्ड ने इसका प्रावधान किया हो। अधिकांश अंतरराष्ट्रीय टेस्ट और वनडे मैचों में DRS का उपयोग होता है, लेकिन कई घरेलू टूर्नामेंट्स में नहीं।
DRS में कितनी चुनौतियाँ मिलती हैं?
टेस्ट क्रिकेट में, प्रत्येक टीम को प्रति पारी दो चुनौतियाँ मिलती हैं। यदि चुनौती सफल होती है, तो एक अतिरिक्त चुनौती दी जाती है। T20 और ODI मैचों में भी यही नियम लागू होता है।
क्या अम्पायर DRS के बिना कोई निर्णय बदल सकता है?
हां। अम्पायर अपने अधिकार के तहत “अम्पायर की कॉल” (Umpire’s Call) का उपयोग कर सकता है, जब तकनीकी डेटा स्पष्ट नहीं होता। इस स्थिति में मूल निर्णय बरकरार रहता है।
DRS की लागत कौन वहन करता है?
आमतौर पर, मेजबान देश का क्रिकेट बोर्ड DRS की लागत वहन करता है। ICC कभी-कभी छोटे देशों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है, लेकिन यह अस्थायी है।
क्या DRS 100% सटीक है?
नहीं। DRS एक अनुमान आधारित प्रणाली है। हॉक-आई की गणना गेंद के पहले 2.6 मीटर के आधार पर की जाती है, जो वास्तविकता से भिन्न हो सकती है।
निष्कर्ष: DRS विवाद का भविष्य क्या है?
DRS क्रिकेट के विकास की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन यह अभी भी पूर्ण नहीं है। हालिया विवाद से स्पष्ट है कि तकनीक और मानवीय निर्णय के बीच संतुलन बनाए रखना एक जटिल कार्य है। BCCI की मांग सही है, लेकिन समाधान केवल एक देश के लिए नहीं, बल्कि पूरे खेल के लिए लंबे समय तक टिकाऊ होना चाहिए।
ICC के लिए अगला कदम एक स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा करना चाहिए, जिसमें वैज्ञानिक, अम्पायर और पूर्व खिलाड़ी शामिल हों। DRS को एक सहायता उपकरण के रूप में बनाए रखना चाहिए, न कि एक अम्पायर के विकल्प के रूप में। अंततः, क्रिकेट का आत्मा – अनिश्चितता, मानवीय त्रुटि और नाटक – को संरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कि न्याय सुनिश्चित करना।
जैसे-जैसे तकनीक आगे बढ़ती है, DRS भी विकसित होगा। लेकिन खेल के प्रति आदर और नियमों की भावना को कभी नहीं भूलना चाहिए। DRS का उद्देश्य खेल को न्याय देना है, उसे निर्जीव मशीन में बदलना नहीं। और यही संतुलन आने वाले दिनों में क्रिकेट प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।