
दिसंबर 2025 के आखिरी सप्ताह में, जब दुनिया क्रिसमस की तैयारियों में व्यस्त है, तब भी पूर्वी यूरोप के कुछ हिस्सों में गोलियों की आवाज़ें त्योहार की खुशियों को दूर कर देती हैं। रूस और यूक्रेन के बीच जारी यह संघर्ष, जो फरवरी 2022 में एक पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के रूप में शुरू हुआ था, आज भी न तो खत्म हुआ है और न ही इसके अंत का कोई स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहा है। यह सिर्फ़ दो देशों का युद्ध नहीं रह गया है—यह एक वैश्विक भू-राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संकट बन चुका है, जिसकी गूंज अफ्रीका से लेकर एशिया तक सुनाई दे रही है।
संघर्ष की शुरुआत: संदर्भ ज़रूरी है
यह संघर्ष अचानक नहीं शुरू हुआ। 2014 में क्रीमिया के रूस द्वारा अधिग्रहण और डोनबास क्षेत्र में समर्थित विद्रोही गतिविधियों ने इसकी नींव रखी थी। यूक्रेन की यूरोपीय संघ की ओर बढ़ने की इच्छा, रूस के लिए एक रणनीतिक खतरे के रूप में उभरी, जिसे मॉस्को ने “अपने प्रभाव क्षेत्र” में हस्तक्षेप माना। इसके बाद के वर्षों में मिन्स्क समझौते सहित कई शांति प्रयास विफल रहे, और 24 फरवरी 2022 को रूस ने यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू कर दिया।
नाटो ने इसे “यूरोप में युद्ध की सबसे बड़ी वापसी” के रूप में वर्णित किया, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की सबसे बड़ी सैन्य टक्कर है। यूरोपीय संघ ने तुरंत प्रतिक्रिया दी, और संयुक्त राष्ट्र महासभा ने रूस के आक्रमण की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें 141 देशों ने समर्थन दिया।
आज की स्थिति: एक जमी हुई लेकिन विस्फोटक स्थिति
दिसंबर 2025 तक, रूस-यूक्रेन युद्ध एक “गतिरोध” (stalemate) में प्रवेश कर चुका है, लेकिन यह गतिरोध नाजुक है। दोनों पक्षों ने सैकड़ों किलोमीटर लंबी सामने की रेखा (frontline) के साथ गहन रक्षा प्रणालियाँ स्थापित कर ली हैं। यूक्रेन की 2023 की प्रतिक्रिया के बाद से, जिसमें खेरसॉन और खार्कीव के कुछ हिस्सों को मुक्त कराया गया था, युद्ध का पैमाना धीमा पड़ गया है। हालाँकि, यह निष्क्रियता नहीं है—यह एक विस्फोटक ठहराव है।
यूक्रेनी सेना, पश्चिमी हथियारों—विशेषकर HIMARS, Leopard 2 टैंक और F-16 लड़ाकू विमानों की संभावित आपूर्ति—के साथ सुदृढीकरण पर निर्भर कर रही है। वहीं, रूस ने अपने सैन्य-औद्योगिक परिसर को तेज़ कर दिया है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के अनुसार, 2024 में रूस ने अपने रक्षा बजट में 25% की वृद्धि की, जो शीत युद्ध के बाद का सबसे बड़ा निवेश है।
ड्रोन युद्ध अब मैदान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। यूक्रेन ने स्वदेशी ड्रोन विकसित किए हैं, जबकि रूस ईरान और उत्तर कोरिया से ड्रोन और गोला-बारूद प्राप्त कर रहा है। यह एक नया युद्ध प्रणाली है—कम लागत वाले ड्रोन से उच्च मूल्य वाले लक्ष्यों को नष्ट करना।
मानवीय संकट: अदृश्य पीड़ा
युद्ध की सबसे भयावह लागत मानवीय है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक युद्ध में कम से कम 35,000 नागरिक मारे जा चुके हैं, हालाँकि वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है। लगभग 6 मिलियन यूक्रेनी शरणार्थी यूरोप भर में बिखरे हुए हैं, जबकि 3.7 मिलियन आंतरिक रूप से विस्थापित हैं।
बच्चे विशेष रूप से प्रभावित हुए हैं। यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 के अंत तक यूक्रेन में 2,000 से अधिक स्कूल नष्ट या क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। कई बच्चे दो साल से अधिक समय तक नियमित शिक्षा से वंचित रहे हैं। साथ ही, मनोवैज्ञानिक तनाव, PTSD और भविष्य के प्रति अनिश्चितता एक गहरा घाव छोड़ रहे हैं।
वैश्विक आर्थिक प्रभाव: आपकी कीमतों पर असर
यह युद्ध केवल यूरोप तक सीमित नहीं है। यूक्रेन और रूस दोनों ही वैश्विक अनाज, खाद्य तेल और उर्वरक के प्रमुख निर्यातक हैं। युद्ध के कारण अनाज की कीमतें तेजी से बढ़ीं, जिससे अफ्रीका और मध्य पूर्व में खाद्य सुरक्षा संकट पैदा हुआ।
2022 में शुरू हुआ “अनाज सौदा” संयुक्त राष्ट्र और तुर्की के प्रयासों से अस्थायी राहत लाया, लेकिन रूस ने जुलाई 2023 में इसके प्रस्थान से इनकार कर दिया। हालाँकि, अक्टूबर 2023 के बाद से एक अस्थायी व्यवस्था चल रही है, लेकिन विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के अनुसार, यह पर्याप्त नहीं है। अफ्रीकी देशों को अब रूस से सीधे अनाज खरीदने पर विचार करना पड़ रहा है, जो भू-राजनीतिक जटिलताओं को और गहरा कर रहा है।
ऊर्जा क्षेत्र पर भी गहरा प्रभाव पड़ा है। यूरोप ने रूसी गैस पर निर्भरता कम कर दी है, लेकिन इसकी कीमत ऊर्जा संक्रमण में तेज़ी लानी पड़ी। जर्मनी जैसे देश अब अमेरिकी तरल प्राकृतिक गैस (LNG) पर भरोसा कर रहे हैं, जो महंगा और कार्बन-घनत्व वाला है।
पश्चिम की भूमिका: एकता और अंतर्द्वंद्व
पश्चिमी देशों ने यूक्रेन के समर्थन में अभूतपूर्व एकता दिखाई है। संयुक्त राज्अमेरिका ने 2022 से लेकर दिसंबर 2025 तक यूक्रेन को 75 बिलियन डॉलर से अधिक की सैन्य और मानवीय सहायता प्रदान की है। कांग्रेसियन रिसर्च सर्विस (CRS) के आंकड़े इसे स्पष्ट करते हैं।
हालाँकि, यह एकता अब दबाव में है। अमेरिका में राजनीतिक विभाजन गहरा हो रहा है, जिसमें कुछ रिपब्लिकन नेता यूक्रेन को अधिक सहायता देने का विरोध कर रहे हैं। वहीं, यूरोपीय संघ के भीतर भी असहमति उभर रही है—हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने यूक्रेन को और सहायता देने का विरोध किया है, जबकि पोलैंड ने अपनी सीमा पर तनाव बढ़ा दिया है।
इसके विपरीत, चीन और भारत जैसे गैर-पश्चिमी शक्तियाँ “तटस्थता” बनाए हुए हैं, लेकिन व्यावहारिक रूप से रूस का समर्थन कर रही हैं। चीन ने रूस को तकनीकी घटक और आर्थिक सहायता जारी रखी है, जबकि भारत रूसी तेल का एक प्रमुख खरीदार बन गया है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के अनुसार, भारत अब रूस से तेल का 35% आयात करता है, जो 2021 में केवल 2% था।
रूस की रणनीति: दीर्घकालिक युद्ध की ओर
रूस अब एक “दीर्घकालिक युद्ध” की रणनीति अपना रहा है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्पष्ट किया है कि रूस “जीत तक” लड़ेगा। यह रूस के लिए एक अस्तित्वगत युद्ध है—एक ऐसा युद्ध जो उसकी वैश्विक प्रतिष्ठा, भू-राजनीतिक प्रभाव और आंतरिक स्थिरता को परिभाषित करता है।
2024 में, रूस ने डोनेट्स्क और लुहांस्क के कई शहरों—विशेषकर अवदीवका—पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। हालाँकि, ये लाभ धीमे और महंगे रहे हैं। रूस की सैन्य हानि 300,000 से अधिक आदमियों के अनुमानित है, जिसमें मारे गए, घायल और पकड़े गए सैनिक शामिल हैं। यह आंकड़ा यूक्रेनी खुफिया सेवा और पश्चिमी विश्लेषकों द्वारा पुष्टि किया गया है।
यूक्रेन का संघर्ष: प्रतिरोध और थकान
यूक्रेन अपनी जमीन की रक्षा करने में सफल रहा है, लेकिन इसकी कीमत भारी रही है। अर्थव्यवस्था लगभग पूरी तरह से पश्चिमी सहायता पर निर्भर है। वैश्विक समुदाय के समर्थन में कमी आने से यूक्रेन की स्थिति कठिन हो सकती है।
राष्ट्रपति वलोडिमीर ज़ेलेंस्की ने नाटो सदस्यता की मांग को अपनी विदेश नीति का केंद्र बना रखा है, लेकिन 2023 विल्नियस शिखर सम्मेलन में यह स्पष्ट हो गया कि युद्ध खत्म होने तक यूक्रेन को सदस्यता नहीं दी जाएगी। इसके बजाय, यूक्रेन को “अंतरिम सुरक्षा समझौते” का वादा किया गया है, जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस शामिल हैं।
रूस बनाम यूक्रेन: स्थिति की तुलना (दिसंबर 2025)
| पैरामीटर | रूस | यूक्रेन |
|---|---|---|
| सैन्य नियंत्रण | डोनबास के बड़े हिस्से, खेरसॉन का दक्षिणी तट | उत्तरी और पश्चिमी यूक्रेन, पश्चिमी डोनबास |
| अर्थव्यवस्था | तेल और गैस निर्यात से स्थिर, लेकिन प्रतिबंधों से प्रभावित | पश्चिमी सहायता पर निर्भर, लेकिन आईएमएफ से ऋण समझौते |
| अंतरराष्ट्रीय समर्थन | चीन, ईरान, उत्तर कोरिया, कुछ गैर-पश्चिमी देश | नाटो, यूरोपीय संघ, संयुक्त राज्य, G7 देश |
| आंतरिक राजनीति | पुतिन का नियंत्रण मजबूत, विरोध दमित | युद्धकालीन अध्यादेश, लेकिन लोकतांत्रिक संस्थाएँ सक्रिय |
| भविष्य की रणनीति | “दीर्घकालिक युद्ध”, पश्चिम की एकता में दरार का फायदा उठाना | नाटो/ईयू में शामिल होना, F-16 और लंबी दूरी के हथियार प्राप्त करना |
शांति की संभावना: क्या कोई रास्ता है?
वर्तमान में, कोई भी शांति समझौता दूर की कहानी लगता है। रूस यूक्रेन के “न्यूनतम शर्तों”—क्रीमिया और डोनबास के अधिग्रहण को मान्यता—को स्वीकार करने को तैयार नहीं है। वहीं, यूक्रेन अपनी संप्रभुता और 1991 की सीमाओं की बहाली पर अडिग है।
वियना सेंटर फॉर डिसआर्मामेंट एंड नॉन-प्रोलिफरेशन के विश्लेषकों का कहना है कि वास्तविक शांति केवल तभी संभव है जब कोई एक पक्ष स्पष्ट रूप से हार मान ले—और अभी तक ऐसा लगता नहीं है कि ऐसा होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. क्या यह युद्ध परमाणु युद्ध में बदल सकता है?
वर्तमान में, ऐसी संभावना अत्यंत कम है। रूस ने “परमाणु धमकियाँ” दी हैं, लेकिन पश्चिमी खुफिया एजेंसियाँ इसे मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा मानती हैं। हालाँकि, ज़पोरिज़्हिया परमाणु संयंत्र जैसे स्थानों पर लड़ाइयाँ गंभीर जोखिम पैदा करती हैं। IAEA निरंतर निगरानी कर रहा है।
2. क्या यूक्रेन नाटो में शामिल हो सकता है?
युद्ध के दौरान नहीं। नाटो का नियम है कि कोई भी सदस्य देश युद्ध में नहीं हो सकता। हालाँकि, 2023 के शिखर सम्मेलन में यूक्रेन को “भविष्य की सदस्यता” का आश्वासन दिया गया है।
3. भारत की इस संघर्ष में क्या भूमिका है?
भारत ने “तटस्थता” की नीति अपनाई है। यह न तो रूस की निंदा करता है और न ही यूक्रेन की सीधे समर्थन करता है। हालाँकि, भारत रूसी तेल खरीद रहा है और यूक्रेन को मानवीय सहायता दे रहा है।
4. क्या अमेरिका या यूरोप सीधे युद्ध में शामिल हो सकते हैं?
वर्तमान में, ऐसा नहीं होगा। नाटो ने स्पष्ट किया है कि यह यूक्रेन के साथ “युद्ध में नहीं है”। हालाँकि, पश्चिमी हथियार आपूर्ति और खुफिया सहायता यूक्रेन के लिए महत्वपूर्ण है।
5. क्या शांति वार्ता फिर से शुरू हो सकती है?
हाँ, लेकिन केवल तभी जब दोनों पक्षों को लगे कि वे युद्धक्षेत्र पर कोई महत्वपूर्ण लाभ नहीं उठा सकते। वर्तमान में, दोनों पक्ष अपनी स्थिति से संतुष्ट नहीं हैं, लेकिन वार्ता के लिए तैयार भी नहीं हैं।
निष्कर्ष: एक अनिश्चित भविष्य और हमारी ज़िम्मेदारी
रूस-यूक्रेन संघर्ष अब एक परीक्षण बन गया है—आधुनिक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की, लोकतंत्र की, और मानवता की सामूहिक इच्छाशक्ति की। यह केवल यूक्रेन के लिए नहीं, बल्कि उन सभी देशों के लिए है जो संप्रभुता, कानून के शासन और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर विश्वास करते हैं।
जबकि युद्ध का अंत अनिश्चित है, एक बात स्पष्ट है: दुनिया जैसी 2022 से पहले थी, वैसी वापस नहीं आ सकती। नए गठबंधन उभर रहे हैं, ऊर्जा नीतियाँ बदल रही हैं, और सुरक्षा सोच फिर से परिभाषित की जा रही है।
हम सभी, चाहे हम कहीं भी रहते हों, इस संघर्ष से जुड़े हैं—हमारे ऊर्जा बिल से लेकर हमारे खाने की कीमत तक। जानकारी प्राप्त करना, विश्वसनीय स्रोतों से समाचार पढ़ना, और मानवीय संकट के प्रति सहानुभूति रखना—ये छोटे कदम हैं, लेकिन महत्वपूर्ण हैं। क्योंकि इतिहास हमें याद दिलाता है कि जब दुनिया चुप रहती है, तो अंधेरा गहरा हो जाता है। और आज, जब क्रिसमस की रोशनी दुनिया भर में जल रही है, तो यूक्रेन के कई शहरों में अंधेरा सिर्फ़ बिजली की कमी नहीं—बल्कि भविष्य के प्रति अनिश्चितता का प्रतीक है।