
भारत के उत्तरी मैदानी इलाकों में सर्दियों का मौसम केवल ठंढ के लिए नहीं, बल्कि घने कोहरे के लिए भी जाना जाता है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश (UP) और बिहार जैसे राज्यों में, दिसंबर से फरवरी तक का समय कोहरे की चपेट में आ जाता है। यह कोहरा केवल दृश्यता को प्रभावित नहीं करता, बल्कि यातायात, स्वास्थ्य, कृषि और दैनिक जीवन के कई पहलुओं पर गहरा प्रभाव डालता है। जब मौसम विभाग या स्थानीय समाचार पत्र “कोहरे का अलर्ट” जारी करते हैं, तो यह केवल एक सामान्य सूचना नहीं होती—यह एक गंभीर मौसमी चेतावनी है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इस लेख में, हम उत्तर प्रदेश और बिहार में कोहरे के कारणों, प्रभाव, वर्तमान मौसम की स्थिति, विशेषज्ञ सुझावों और सुरक्षा उपायों की गहन जांच करेंगे। चाहे आप किसान हों, ड्राइवर, स्कूल जाने वाले छात्र या शहरी निवासी—यह जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण है।
कोहरा क्या है और यह उत्तर भारत में इतना आम क्यों है?
कोहरा तब बनता है जब हवा में नमी की मात्रा इतनी अधिक हो जाती है कि यह सतह के पास ठंढी होकर छोटे-छोटे जल कणों में परिवर्तित हो जाती है। ये जल कण हवा में निलंबित रहते हैं और दृश्यता को गंभीर रूप से कम कर देते हैं।
उत्तर भारत—खासकर UP और बिहार—में कोहरे की समस्या भौगोलिक और मौसमी कारकों के कारण विशेष रूप से गंभीर है। गंगा के मैदानी इलाकों में नदियों, तालाबों और सिंचाई प्रणालियों के कारण हवा में नमी का स्तर उच्च रहता है। साथ ही, सर्दियों में रातों की लंबाई और तापमान में तेज गिरावट भी कोहरे के गठन में मदद करती है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दिसंबर और जनवरी महीनों में यहां औसत दृश्यता 50 मीटर तक गिर सकती है।
इसके अलावा, वायु प्रदूषण—खासकर धान कटाई के बाद पंजाब और हरियाणा में होने वाली पराली जलाने की प्रथा—भी स्थायी कोहरे को बढ़ावा देता है। एक अध्ययन जो भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी द्वारा प्रकाशित किया गया, इंगित करता है कि प्रदूषण कण (एरोसोल) जल वाष्प के संघनन के लिए केंद्र का काम करते हैं, जिससे कोहरा अधिक घना और लंबे समय तक रहता है।
आज का मौसम: UP और बिहार में कोहरे की वर्तमान स्थिति
23 दिसंबर, 2025 को, उत्तर प्रदेश और बिहार के अधिकांश भागों में घना कोहरा दर्ज किया गया है। लखनऊ, वाराणसी, पटना और गया जैसे प्रमुख शहरों में सुबह के समय दृश्यता 100 मीटर से कम रही है। IMD के नवीनतम बुलेटिन के अनुसार, अगले 48 घंटों के दौरान यह स्थिति बनी रहने की संभावना है, विशेषकर जब तापमान 5°C से नीचे गिरता है और हवा की गति 5 किमी/घंटा से कम रहती है।
कृषि क्षेत्रों में, जहां सुबह के समय ओस और ठंढ का संयोजन होता है, कोहरा और भी घना हो जाता है। राज्य सरकारों ने स्कूलों और कॉलेजों के लिए सलाह जारी की है कि वे सुबह 10 बजे तक कक्षाएं शुरू न करें। राष्ट्रीय राजमार्गों पर, दिल्ली-कलकत्ता और दिल्ली-पटना रूट जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर यातायात नियंत्रण किया जा रहा है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने ड्राइवरों को धीमी गति से चलाने और हेडलाइट्स का उपयोग करने की सलाह दी है।
कोहरे का स्वास्थ्य पर प्रभाव: सांस लेने की समस्या से लेकर त्वचा तक
कोहरा केवल दृश्यता तक सीमित नहीं है—यह स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक हो सकता है, खासकर जब यह वायु प्रदूषण के साथ मिल जाता है। घने कोहरे में नमी के साथ-साथ PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कण भी शामिल होते हैं, जो सांस लेने वाली समस्याओं, एलर्जी और आंखों में जलन का कारण बन सकते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, लंबे समय तक प्रदूषित कोहरे के संपर्क में रहने से ब्रोंकाइटिस, अस्थमा और यहां तक कि हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है। बच्चे, बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं।
इसके अलावा, त्वचा भी प्रभावित हो सकती है। नमी और प्रदूषण का मिश्रण त्वचा को रूखा और खुजली वाला बना सकता है। भारतीय त्वचा विज्ञान संघ (IADVL) सुझाव देता है कि सुबह-शाम मॉइस्चराइज़र लगाना और बाहर निकलने से पहले मास्क पहनना आवश्यक है।
यातायात और रोजमर्रा की जिंदगी पर प्रभाव
उत्तर भारत में कोहरे का सबसे तत्काल प्रभाव यातायात पर पड़ता है। रेलवे विभाग अक्सर सुबह के समय ट्रेनों को देरी से चलाता है या उन्हें रद्द कर देता है। भारतीय रेलवे के अनुसार, 2024-25 के सर्दियों में अब तक 120 से अधिक ट्रेनों को प्रभावित किया गया है, जिनमें से अधिकांश पूर्वी और उत्तरी जोन में चलती हैं।
सड़क परिवहन में भी हालात चिंताजनक हैं। कई बार भारी वाहन चालक कोहरे के कारण रास्ता भटक जाते हैं या दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। [राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण] के आंकड़ों से पता चलता है कि सर्दियों में दुर्घटनाओं की दर 30% बढ़ जाती है।
शहरी क्षेत्रों में, ऑफिस और व्यापारिक गतिविधियां धीमी पड़ जाती हैं। स्कूली बच्चों के लिए सुबह जल्दी उठना और बसों में यात्रा करना खतरनाक हो जाता है। ग्रामीण इलाकों में, किसानों को खेतों में काम करने में देरी होती है, जिससे फसलों की देखभाल प्रभावित होती है।
कृषि पर प्रभाव: फसलों के लिए कोहरा वरदान या अभिशाप?
कोहरे का कृषि पर द्वंद्वात्मक प्रभाव होता है। एक ओर, कोहरा खेतों को नमी प्रदान करता है, जो रबी फसलों—जैसे गेहूं, चना और सरसों—के लिए फायदेमंद हो सकता है। विशेष रूप से जब बारिश कम हो, तो कोहरा मिट्टी की नमी बनाए रखने में मदद करता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अध्ययन बताते हैं कि कुछ क्षेत्रों में कोहरे से गेहूं की उपज में सुधार हुआ है।
लेकिन दूसरी ओर, अगर कोहरा बहुत लंबे समय तक रहता है, तो यह फंगल बीमारियों—जैसे रस्ट और ब्लाइट—को बढ़ावा देता है। यह बीजों के अंकुरण को भी प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, कोहरे के कारण धूप कम मिलने से प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है, जिससे पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है।
कोहरे के दौरान सुरक्षित रहने के लिए विशेषज्ञ सुझाव
कोहरे के मौसम में सुरक्षित रहने के लिए कुछ व्यावहारिक उपाय अपनाना आवश्यक है। इन सुझावों को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा नियमित रूप से जारी किया जाता है:
- ड्राइविंग के दौरान: हमेशा हेडलाइट्स और फॉग लैंप्स का उपयोग करें। गति 30 किमी/घंटा से अधिक न बढ़ाएं। यदि संभव हो, तो सुबह 10 बजे से पहले यात्रा न करें।
- स्वास्थ्य सुरक्षा: N95 मास्क पहनें, खासकर यदि आप बाहर निकल रहे हैं। हाथ और चेहरा नियमित रूप से धोएं।
- बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल: उन्हें सुबह जल्दी बाहर न जाने दें। यदि स्कूल खुला है, तो वाहन व्यवस्था सुनिश्चित करें।
- घरेलू उपाय: घर के अंदर हवा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए एयर प्यूरीफायर या नमक के लैंप का उपयोग करें।
उत्तर प्रदेश बनाम बिहार: कोहरे की तीव्रता और प्रबंधन में तुलना
| पैरामीटर | उत्तर प्रदेश | बिहार |
|---|---|---|
| औसत दृश्यता (दिसंबर) | 50–100 मीटर | 75–120 मीटर |
| प्रभावित प्रमुख शहर | लखनऊ, कानपुर, वाराणसी | पटना, गया, मुजफ्फरपुर |
| यातायात प्रबंधन | NHAI और राज्य पुलिस द्वारा जोखिम आधारित निगरानी | सीमित संसाधनों के कारण कम प्रतिक्रिया |
| स्वास्थ्य चेतावनियां | नियमित रूप से जारी की जाती हैं | कम प्रचार, ग्रामीण क्षेत्रों में कम पहुंच |
| कृषि प्रभाव | गेहूं की खेती अधिक प्रभावित | सरसों और चना ज्यादा प्रभावित |
उपरोक्त तालिका से स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में कोहरा थोड़ा अधिक घना होता है, लेकिन बिहार में प्रबंधन क्षमता कमजोर है। यह अंतर बुनियादी ढांचे और संसाधन आवंटन पर निर्भर करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. कोहरे का अलर्ट किस आधार पर जारी किया जाता है?
IMD दृश्यता, तापमान और हवा की आर्द्रता के आधार पर अलर्ट जारी करता है। यदि दृश्यता 200 मीटर से कम हो जाती है, तो “घना कोहरा अलर्ट” जारी किया जाता है।
Q2. क्या कोहरा वायु प्रदूषण से जुड़ा है?
हां। प्रदूषण के कण कोहरे के कणों के आसपास संघनित होते हैं, जिससे “स्मॉग” बनता है, जो अधिक खतरनाक होता है।
Q3. क्या मोबाइल ऐप्स से कोहरे की चेतावनी मिल सकती है?
हां। IMD का मौसम ऐप, AccuWeather, और भारत सरकार का UMANG ऐप वास्तविक समय की चेतावनियां प्रदान करते हैं।
Q4. क्या बच्चों को स्कूल भेजना सुरक्षित है?
यदि दृश्यता 100 मीटर से कम है, तो स्कूल जाना जोखिम भरा हो सकता है। कई जिलों में स्थानीय प्रशासन सुबह 10 बजे तक कक्षाएं स्थगित कर देता है।
Q5. कोहरा कब तक रहता है?
आमतौर पर सूर्योदय के बाद 2-3 घंटे में कोहरा हल्का हो जाता है। लेकिन यदि तापमान कम रहता है और हवा शांत है, तो यह दोपहर तक रह सकता है।
निष्कर्ष: सतर्कता, जागरूकता और सहयोग की आवश्यकता
उत्तर प्रदेश और बिहार में कोहरे की स्थिति केवल एक मौसमी घटना नहीं है—यह एक बहुआयामी चुनौती है जिसमें पर्यावरण, स्वास्थ्य, परिवहन और कृषि शामिल हैं। जबकि प्राकृतिक कारक इसकी भूमिका निभाते हैं, मानव निर्मित प्रदूषण ने इस समस्या को और गहरा कर दिया है।
हालांकि, यह स्थिति निराशाजनक नहीं है। सही जानकारी, सरकारी पहल और नागरिक जागरूकता के माध्यम से इसके प्रभावों को कम किया जा सकता है। चाहे वह N95 मास्क पहनना हो, या किसानों द्वारा पराली जलाने के विकल्प अपनाना हो—हर कदम मायने रखता है।
आज का कोहरे का अलर्ट केवल एक सूचना नहीं, बल्कि एक आह्वान है—सावधानी बरतने, जानकारी साझा करने और एक-दूसरे की देखभाल करने का। क्योंकि जब धुंध छाई होती है, तो सबसे ज्यादा जरूरत होती है—एक-दूसरे के लिए रोशनी बनने की।
अपने क्षेत्र का नवीनतम मौसम अपडेट प्राप्त करने के लिए, हमेशा भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या स्थानीय अधिकारियों के सूचना चैनलों पर नजर रखें। सुरक्षित रहें, सतर्क रहें।